हिन्दी व्याकरण प्रतियोगिता

श्रीकृष्णा स्कूल के विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय हिन्दी व्याकरण प्रतियोगिता में किया शानदार प्रर्दशन 


यद्यपि बहु नाधीषे तथापि पठ पुत्र व्याकरणम् |
स्वजनो श्र्वजनो माभूत्सकलं शकलं सकृत्शकृत् ||
अर्थात हे पुत्र ! यदि तुम बहुत अधिक विद्वान नहीं बन पाते हो या बहुत अधिक नहीं पढ़ पाते हो , तो भी व्याकरण अवश्य पढ़ो , जिससे कि ‘स्वजन’ (अपने लोग) के स्थान पर ‘श्र्वजन’ (कुत्ता) तथा ‘सकल’ (सम्पूर्ण) के स्थान पर ‘शकल’ (टूटा हुआ) और ‘सकृत्’ (किसी समय) के स्थान पर ‘शकृत’ ( गोबर का घर) न हो जाय |
कहने का तात्पर्य यह है कि यदि व्याकरण का ज्ञान नही रहेगा तो समाज में उपहास के पात्र हो जायेंगे|
किसी भी राष्ट्र की पहचान उसके भाषा और उसके संस्कृति से होती है और पूरे विश्व में हर देश की एक अपनी भाषा और अपनी एक संस्कृति है जिसे छाव में उस देश के लोग पले बड़े होते है यदि कोई देश अपनी मूल भाषा को छोड़कर दुसरे देश की भाषा पर आश्रित होता है उसे सांस्कृतिक रूप से गुलाम माना जाता है।
हिन्दी भाषा और व्याकरण के महत्व को समझते हुए और इसकी महत्ता को अन्य तक पहुंचाने के लिए श्रीकृष्णा स्कूल महेन्द्रगढ़ के प्रांगण में राष्ट्रीय शिक्षा समिति द्वारा राज्य स्तरीय हिन्दी व्याकरण प्रतियोगिता आयोजित की गई।


 इस प्रतियोगिता में स्कूल के कक्षा पांचवी से दसवीं कक्षां तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। स्कूल के विद्यार्थियों ने हिन्दी व्याकरण प्रतियोगिता मे अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए स्कूल के सातवीं व आठवीं कक्षा वर्ग में अंशू व जय, कक्षा नौवीं से अमन व अजय ने पूरे प्रदेश में टॉप 100 विद्यार्थियों मे शामिल होकर स्कूल व क्षेत्र का नाम गोर्वान्वित किया है।

#SKSians News Clipping

स्कूल के एमडी कर्मवीर राव ने विद्यार्थियों को हिन्दी व व्याकरण के महत्व को समझाते हुए कहा कि हिन्दी विश्व की सशक्त भाषा है। जिसकी अपनी ही लिपि और अपनी ही शैली है। यह भाषा मनुष्य को अनपढ़ता के तल से उठाकर ज्ञान के शिखर पर प्रतिस्थापित करती है। हिन्दी मनुष्य का ज्ञान ही नही बल्कि उसकी परम पहचान है। उन्होंने विद्यार्थियों को कठोर परिश्रम व सच्ची लग्न से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

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